Wednesday, June 5, 2013

गुज़रा ज़माना گزرا ہوا زمانہ

भोर होते मुर्गी का बांग लगाना
अम्मा का फूँक-फूँक कर चूल्हा सुलगाना,
और उसके धुंवे मे से आती भिनि महक
सुबह की चाय के साथ पी जाना
बड़ा याद आता है वो गुज़रा ज़माना !

गलियारे से वो भैंसों के झुंड का आना
मुरारी की हज़ामत का रुक जाना
पंडित जी का धोती सम्हालना
हर एक चाय की फरमाइश में
अम्मा का ताऊ पे गुस्साना
बड़ा याद आता है वो गुज़रा ज़माना!

खेतों की मेड़ों पर दौड़ लगाना
स्कूल न जाकर, खेतों में छुप जाना
दलदल में फसकर ,कोई बचाओ चिल्लाना
हाथ मिले तो ,उन्हे गिराना !
बड़ा याद आता है वो गुज़रा ज़माना !

बौर के आते ही बगीचे पार डेरा लगाना
आम अमरूद जामुन और संतरे चुराना
चुरा के खाने कुछ और मजा है !
ऐसा कह यूं चुटकी लगाना! और
पकड़े गए तो दोस्तों का मुझे बचाना
बड़ा याद आता है वो गुज़रा ज़माना !

भरी दोपहरी बीहड़ मे घूमना,
थककर पेड़ की छाँव में सो जाना 
दरिया पार करने पर, एक आम की शर्त लगाना
हर गलती मे एक फरलांग दौड़ लगाना
बड़ा याद आता है वो गुज़रा ज़माना !!

Tuesday, April 23, 2013

मेरी रहने दे, आज कुछ अपनी सुना Life -2


मेरी रहने दे, आज कुछ अपनी सुना!!

हसने की आदत रही है सदियों से
किस्मत तू आज मायूस क्यों खड़ी है
आज ज़रा,  मेरा दिल और दुखा !!

किसी की निगाहों से पी थी
शराब ऐसी की उतरती नहीं
बहोत दिन हुए, ज़िन्दगी
कुछ गम ए शब् तो पिला !!

मुक्कद्दर  की क्या कहूँ  बहोत ऊँचा उठा हूँ
मेरे तबियत की तलब कहती रही
एक बार,  आज मुझको फिर गीरा !!

मदमस्त थे अपनी कहकहों में
परस्त थे आस्तीन के दोस्तों में
बात बात पर लड़ने वाला,
कोई  दोस्त तो दिला !!

हुआ मश्हूर हमारा नाम
शहर में होकर बदनाम
चंद चमकते कपडे शराफ़त के
पहनकर,कोई शरीफ़ कहाँ होगा
रिंधों की दुआ शायद, दे मुझे शरीफ बना !!

देने वाले दिया करते थे नसीहत बेबाक
इल्म  न था उस जहाँ का
अब जीने के लिए, कोई तो दे मशवरा !!

एक रात हुई थी चोरी मेरे अरमानो की
आज महफ़िल है  मौका भी और सामान भी
ओ फ़रिश्ते!  चुराना ही है तो मेरी जान चुरा !!

खानाबदोश हो दर दर भटके
माय्खार को  कोई तो जगह दे
हर सांस अब कहती है ये,
 कोई तो दे आराम दिला !!

मेरे गुरूर का सुरूर अभी उतरा है
मेरे दोस्त! ये शाम अब कैसे गुजरे
रूह तलबगार हुई है ! आज रूहानी पैमाने की
कोई तो दे मुझे आज  पिला !!

Pic: uproxx.com