Wednesday, June 5, 2013

गुज़रा ज़माना گزرا ہوا زمانہ

भोर होते मुर्गी का बांग लगाना
अम्मा का फूँक-फूँक कर चूल्हा सुलगाना,
और उसके धुंवे मे से आती भिनि महक
सुबह की चाय के साथ पी जाना
बड़ा याद आता है वो गुज़रा ज़माना !

गलियारे से वो भैंसों के झुंड का आना
मुरारी की हज़ामत का रुक जाना
पंडित जी का धोती सम्हालना
हर एक चाय की फरमाइश में
अम्मा का ताऊ पे गुस्साना
बड़ा याद आता है वो गुज़रा ज़माना!

खेतों की मेड़ों पर दौड़ लगाना
स्कूल न जाकर, खेतों में छुप जाना
दलदल में फसकर ,कोई बचाओ चिल्लाना
हाथ मिले तो ,उन्हे गिराना !
बड़ा याद आता है वो गुज़रा ज़माना !

बौर के आते ही बगीचे पार डेरा लगाना
आम अमरूद जामुन और संतरे चुराना
चुरा के खाने कुछ और मजा है !
ऐसा कह यूं चुटकी लगाना! और
पकड़े गए तो दोस्तों का मुझे बचाना
बड़ा याद आता है वो गुज़रा ज़माना !

भरी दोपहरी बीहड़ मे घूमना,
थककर पेड़ की छाँव में सो जाना 
दरिया पार करने पर, एक आम की शर्त लगाना
हर गलती मे एक फरलांग दौड़ लगाना
बड़ा याद आता है वो गुज़रा ज़माना !!

Tuesday, May 14, 2013

Log-2 लोग لوگ




अनजानों  सी बातें होती है आजकल
सीने से लगा ,क्यूँ अपना बनाते है लोग !

कभी लिखे थे मोहब्बत के पयां  जिनमे,
कोरा कागज समझ ,अरमानों को 
क्यूँ  आग लगाते है लोग !

हाथ थामते साथ चलते, मंज़िल दिखाते,
आधे सफ़र में, क्यूँ छोड़ जाते है लोग !

डूबती ज़िंदगी को साहिल देने वाल,
मझधार में क्यूँ छोड़ जाते है लोग !

भुलाए नहीं भुलाते जो रिश्ते,
रिश्ते ऐसे  क्यूँ  बनाते  है लोग !

अभी तो सपनों की ताबीर टूटी नही,
सपने ही सही मेरे ,
हकीक़त में सपने तोड़ जाते है लोग !

वजह क्या होती हम सोचते ही रहे ,
सफाई हमारी तो कुछ सुनते लोग!

हम  ही क्यूँ  तड़पते  और जलते  !
तकलीफ मे मेरी तो सुलगते वो !!

दिल की चोटें बस हम ही क्यूँ  भाता ,
दर्द जुदाई का काश उन्हे भी सताता !
जैसे तोड़ा मेरा  दिल !
उनका भी दिल जरा टूट  जाता,
अज़ीज़ कोई उनका उन्हे छोड़ जाता !!

मेरी दिल की लगी को दिल्लगी समझे,
काश मेरी तकल्लुफ़ का अंदाज़ा तो लगाते लोग  !!

Pic:Google.